
टेक्नोलॉजी की दुनिया में जिस तरह से कंम्प्यूटर व मोबाइल का प्रयोग बढ़ा है। उसी तरीके से साइबर फ्रॉड भी तरह तरह की ट्रिक अपना रहे हैं। हाल ही में जिस गिरोहा का खुलासा हुआ है। वह आपकी रोजमर्रा की जिदंगी से जुड़ा है। तो आज हम Old Phone Data Theft से डेटा चोरी होने के बारे में बात करेंगे।
इस गिरोह के कारनामों के बारे में सुनेंगे ता आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। जी हां दोस्तों इन दिनों गलियों में कबाड़े वाले पुराने टूटे मोबाइल व लैपटॉप को लेते हैं। इसके बदले में प्लास्टिक का सामान या फिर आपको एक पचास का कड़क नोट मिला होगा।
उस समय पर आपने सोचा कि घर का कचरा भी निकल गया, कुछ पैसे भी आ गए लेकिन लेकिन दोस्तों हाथरस हो या दिल्ली या देश का कोई भी शहर, आपके घर से निकला पचास रुपये का वो कबाड़ा साइबर अपराधियों तक पहुंच रहा है। यह इन अपराधियों के लिए लाखों रुपये की तिजोरी बन चुका है।
आपका खराब फोन साइबर ठगों तक किस तरीके से पहुंच रहा है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको यह बताएंगे कि आपके खराब फोन व कंम्प्यूटर से साइबर ठगों के द्वारा किस तरीके से डेटा निकाला जाता है।
जिससे ठगी की जा रही है। आपका डेटा साइबर अपराधियों तक कैसे पहुंच रहा है।
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50 रुपये के फोन की 30,000 रुपये कीमत कैसे?

हाल ही में मिर्ज़ापुर पुलिस ने एक ऐसे बड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की कॉलोनियों से पुराने फोन (Old Phone )कौड़ियों के भाव खरीदता था।
पुलिस की जांच में जो बात सामने आई, उसने सबको चौंका दिया। ये गिरोह इन खराब स्मार्टफोन्स को बोरों में भरकर बिहार के कटिहार और झारखंड के जामताड़ा (जो साइबर क्राइम का गढ़ माना जाता है) ले जाते थे।
वहां बैठे हैकर्स इन खराब फोन्स से लोगों का पर्सनल डेटा निकालते हैं और फिर उसी डेटा को डार्क वेब पर या अन्य साइबर ठगों को 25 से 30 हज़ार रुपये में बेच देते हैं।
म्यूल अकाउंट’ (Mule Account) का खतरनाक खेल

अब आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि आपके पुराने फोन के डेटा का ये साइबर ठग आखिर करते क्या हैं? आज के डिजिटल युग में हार्डवेयर की कोई कीमत नहीं है। असली सोना आपका डिजिटल फुटप्रिंट है।
जब आप अपना फोन व लैपटॉप बेचते हैं, तो उसमें आपकी प्राइवेट तस्वीरें, व्हाट्सएप चैट्स, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक की डिटेल्स और पासवर्ड्स सेव होते हैं। साइबर अपराधी इस डेटा का इस्तेमाल मुख्य रूप से दो कामों के लिए करते हैं।
- लोन फ्रॉड: आपके आधार और पैन कार्ड का इस्तेमाल करके आपके नाम पर इंस्टेंट लोन ऐप्स से लाखों रुपये का लोन ले लिया जाता है। रिकवरी वाले आपके घर आते हैं और आपको पता ही नहीं होता कि लोन कब लिया गया।
- म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts): ठग आपकी पहचान का इस्तेमाल करके फर्जी बैंक खाते खोलते हैं। फिर वे देशभर में लोगों से करोड़ों रुपये की ऑनलाइन ठगी करते हैं।
- उस काले धन को आपके नाम से खुले इन ‘म्यूल अकाउंट्स में ट्रांसफर करते हैं। जब पुलिस आईपी एड्रेस और आईडी ट्रैक करते हुए पहुंचती है, तो हथकड़ी आपके दरवाज़े पर आती है।
कोमा में पड़े फोन से डेटा कैसे निकलता है? (The Technology Exposed)

हर सवाल हर उस व्यक्ति के दिमाग में आता है जिसे थोड़ी बहुत तकनीक की समझ है। अगर फोन सालों से बंद पड़ा है, उसकी बैटरी फूल चुकी है और डिस्प्ले टूट गया है, तो उसमें से डेटा कैसे निकलेगा। यहीं पर आम आदमी धोखा खा जाता है।
डिजिटल फोरेंसिक एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आपके फोन की स्क्रीन या बैटरी खराब होने से आपका डेटा नष्ट नहीं होता। फोन के मदरबोर्ड पर एक बहुत ही छोटी सी चौकोर चिप लगी होती है। जिसे eMMC (Embedded Multi-Media Controller) या UFS (Universal Flash Storage) चिप कहते हैं।
यह चिप बिल्कुल आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क या पेन ड्राइव की तरह काम करती है और फोन टूटने पर भी 99% मामलों में बिल्कुल सुरक्षित रहती है।
चिप ऑफ फोरेंसिक(Chip-Off Forensics) निकालते हैं डेटा

- वो आपके डेड फोन का मदरबोर्ड निकालते हैं।
- हीट गन की मदद से उस eMMC चिप को सुरक्षित बाहर निकाल लेते हैं।
- बाज़ार में 2 से 3 हज़ार रुपये में मिलने वाले हार्डवेयर प्रोग्रामर टूल (जैसे UFI Box या Z3X Box) में इस चिप को फिट करते हैं।
- इस बॉक्स को कंप्यूटर से कनेक्ट करते ही, आपके डेड फोन का पूरा डेटा, फोटो, वीडियो और चैट्स उनकी स्क्रीन पर आ जाते हैं।
- आपका फोन भले ही कबाड़ हो चुका हो, लेकिन आपका डेटा मिनटों में क्लोन हो जाता है।
मैंने तो फोन रिसेट कर दिया था (सबसे बड़ा भ्रम)

कई स्मार्ट लोग यह सोचकर बेफिक्र हो जाते हैं कि उन्होंने फोन बेचने से पहले उसे ‘फैक्ट्री रिसेट’ (Factory Reset) कर दिया था। लेकिन डेटा रिकवरी की दुनिया में ‘फैक्ट्री रिसेट’ सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है।
जब आप फोन से कोई फाइल डिलीट करते हैं या उसे क्विक रिसेट करते हैं, तो फाइल असल में डिलीट नहीं होती। सिस्टम केवल उस जगह (File Pointer) को खाली (Empty) मार्क कर देता है।
ताकि वहां नया डेटा लिखा जा सके। इंटरनेट पर सैकड़ों ऐसे फ्री और पेड सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं (जैसे Dr.Fone, EaseUS), जो रिसेट किए गए फोन की मेमोरी को डीप स्कैन करके आपकी पुरानी फोटोज़ और कॉन्टैक्ट्स को वापस खींच लाते हैं।
अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा कैसे करें? (The Ultimate Solutions)

अगर आप अपनी डिजिटल पहचान और बैंक खाते को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो ‘My Big Guide’ की तरफ से आपको ये तीन कड़े नियम हमेशा याद रखने चाहिए।
- चालू फोन के लिए ‘डेटा ओवरराइटिंग’ (Data Shredding)
- अगर आपका पुराना फोन चालू हालत में है और आप उसे एक्सचेंज ऑफर में दे रहे हैं या किसी को बेच रहे हैं, तो सिर्फ रिसेट करना काफी नहीं है। आपको ‘डेटा ओवरराइटिंग’ करनी होगी।
- सबसे पहले अपने फोन का सारा ज़रूरी डेटा बैकअप लें और फोन को ‘Factory Data Reset’ कर दें।
- रिसेट होने के बाद फोन को दोबारा चालू करें (इसमें कोई ईमेल आईडी या वाई-फाई लॉगिन न करें)।
- अब फोन का कैमरा खोलें और उसे किसी दीवार की तरफ रखकर 4K या हाई-रेज़ोल्यूशन में वीडियो रिकॉर्डिंग पर छोड़ दें।
- जब तक फोन की मेमोरी पूरी तरह फुल (Storage Full) न हो जाए, तब तक फालतू वीडियो या बड़ी-बड़ी डमी फाइल्स उसमें भरते रहें।
- जब मेमोरी फुल हो जाए, तो फोन को एक बार फिर से ‘Factory Data Reset’ कर दें।
- ससे होगा यह कि आपका पुराना प्राइवेट डेटा उन नई फालतू वीडियो फाइल्स के नीचे हमेशा के लिए दब जाएगा। अब दुनिया का कोई हैकर आपका असली डेटा रिकवर नहीं कर सकता।
डेड फोन का फिजिकल डिस्ट्रक्शन (Physical)

अगर आपका फोन पूरी तरह से डेड है, पानी में गिरकर शॉर्ट हो गया है और ऑन नहीं हो रहा है, तो उसे किसी भी कीमत पर कबाड़ी को न दें। हार्डवेयर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, डेड स्टोरेज को नष्ट करने का एकमात्र 100% सुरक्षित तरीका भौतिक विनाश (Physical destruction) है।
- फोन का बैक पैनल खोलें
- उसका मदरबोर्ड बाहर निकालें।
- मदरबोर्ड पर लगी चौकोर eMMC मेमोरी चिप को हथौड़े से तोड़ दें या किसी स्क्रूड्राइवर से अच्छी तरह खुरच कर नष्ट कर दें।
- एक बार चिप फिजिकली डैमेज हो गई, तो दुनिया की कोई भी मशीन उससे डेटा नहीं निकाल सकती।
लालच से बचें
अपने घर-परिवार के लोगों, खासकर माता-पिता को समझाएं कि गली में आने वाले अनजान फेरी वालों को ई-वेस्ट (E-Waste) न दें। 50 रुपये, एक कटोरी या प्लास्टिक की बाल्टी के लालच में अपनी जीवन भर की कमाई और प्राइवेसी को दांव पर न लगाएं। अपने पुराने गैजेट्स को हमेशा ऑथराइज्ड ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग सेंटर्स में ही दें।
निष्कर्ष (Conclusion)
दोस्तों, तकनीक जितनी सुविधाजनक है, लापरवाही बरतने पर उतनी ही खतरनाक भी साबित हो सकती है। जो कबाड़ी वाला कल तक सिर्फ लोहे और प्लास्टिक का भाव लगाता था, आज उसके पीछे बैठे सफेदपोश अपराधी आपके डेटा का भाव लगा रहे हैं।
जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। इस जानकारी को सिर्फ अपने तक सीमित न रखें। इसे पढ़ें, समझें और इस ब्लॉग पोस्ट को अपने व्हाट्सएप ग्रुप्स में अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें।
इस आर्टिकल में आपको फेरी वालों को गैजेट्स बेचने से होने वाले नुकसान को लेकर जानकारी दी गई है। आप पुराने मोबाइल फोन व लैपटॉप से डेटा को किस तरीके से निकाल सकते हैं।
या फिर डेड फोन के डेटा स्टोरेज को क्षतिग्रस्त कर अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं। यह आर्टिकल पूरे रिसर्च के साथ तैयार किया गया है। ताकि आप तक एकदम सही व सटीक जानकारी पहुंच सके।
